भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020, लागू किए जाने के बाद नई परिस्थितियों में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के लिए उपलब्ध नये अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श एवं तदनुरूप कार्यान्वयन हेतु ‘भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद’ का गठन किया गया है। ‘भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद’ का घोष वाक्य है; “पारस्परिक प्रयासों से अकादमिक उन्नयन एवं क्षमता संवर्धन।” भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद ने विगत तीन वर्षों में हिंदी अध्ययन और अध्यापन के क्षेत्र में किये गए सद् प्रयासों से अपनी अखिल भारतीय पहचान बनाई है। देश भर के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर कार्यरत हिंदी-शिक्षकों के बीच अपनी क्षमता संवर्धन कार्यशालाओं और राष्ट्रीय संगोष्ठियों से परिषद ने अपनी जरूरत सिद्ध की है। हिंदी की अकादमिक गरिमा की प्रतिष्ठा, उच्च गुणवत्तापूर्ण शोध एवं अध्यापन, अधिगम परिणाम आधारित रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम, सूचना तकनीकी आधारित शिक्षण-प्रशिक्षण, कौशल संवर्धन हेतु नवाचारी उद्यम ही भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के शिक्षक साथियों का साझा स्वप्न और सार्थक संकल्प है। इस दिशा में प्रयत्न की शुरुआत एक व्हाट्सएप समूह से हुई और देखते-देखते एक हजार से अधिक हिंदी-प्राध्यापक समूह से जुड़ गए। रोज बनने और बिखर जानेवाले सोशल मीडिया समूहों के दौर में परिषद के साथियों ने अकादमिक अनुशासन और अध्यापकीय गरिमा के साथ विविध महत्त्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चाएँ की। समूह से जुड़े साथियों ने अपने महाविद्यालय/विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम साझा किए, जो परस्पर मार्ग दर्शी सिद्ध हुए।
भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद के उद्देश्य:
- देश भर के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दी शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के सर्वांगीण अकादमिक हितों की रक्षा, अकादमिक उन्नयन, क्षमता संवर्धन के लिए कार्य करना।
- देश भर के विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में पढ़ाए जा रहे हिंदी पाठ्यक्रमों की समीक्षा, समयोचित परिवर्तन-अद्यतन करने हेतु कार्यशालाओं के माध्यम से सुझाव देना।
- केन्द्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर लागू की जाने वाली नीतियों, प्रावधानों के हिंदी शिक्षण और शिक्षक पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा करना तथा तदनुरूप परिवर्तन हेतु कार्यक्रम आयोजित करना।
- राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी की स्वीकार्यता को बढ़ावा देने के लिए सभी भारतीय भाषा-भाषी संस्थाओं, अकादमिक संगठनों के साथ मिल कर प्रयास करना।
- हिंदी भाषा एवं साहित्य तथा अन्य हिंदी भाषा आधारित कला क्षेत्रों से संबंधित विषयों पर संगोष्ठियों, परिसंवादों का आयोजन करना।
- हिंदी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से संबंधित विषयों पर शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का प्रयत्न करना।
- हिंदी से जुड़े रोजगार क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम को अद्यतन करते हुए शिक्षकों को स्व-प्रशिक्षण हेतु प्रेरित करना तथा तदनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
- हिंदी को शिक्षण का माध्यम बनाने के लिए सभी ज्ञान अनुशासनों से संबंधित पाठ्य पुस्तकों को हिन्दी में अनूदित करने एवं स्वतंत्र रूप से लिखने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना।
- भारतीय भाषाओं के साहित्य का हिंदी एवं हिंदी साहित्य का भारतीय भाषाओं में अनुवाद के माध्यम से सांस्कृतिक सौहार्द के लिए प्रयत्न करना।
- हिंदीतर क्षेत्रों में हिंदी भाषा के प्रचार – प्रसार एवं स्वीकार्यता हेतु विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रोत्साहन हेतु विविध योजनाओं का संचालन करना।
- समाज के सभी वर्गों में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन एवं उनका संचालन करना तथा पुस्तकालय एवं वाचनालय की स्थापना करना।
- देश एवं समाज की एकता एवं अखण्डता के लिए जन जागरण करना एवं देश का सुयोग्य नागरिक बनाने में मदद करना।
- पर्यावरण की रक्षा एवं संवहनीय विकास की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना। हिन्दी के पाठ्यक्रम को पर्यावरण सजग बनाना।
- हिंदी शिक्षण के माध्यम से लैंगिक, सामाजिक भेदभाव को दूर करना तथा पाठ्यक्रम को रोजगारोन्मुख एवं उद्यमिता के विकास में सहायक बनाना।
- सामाजिक सुधार और जागरण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करना तथा लोक कलाओं के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनमानस तैयार करना।
उपर्युक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु परिषद ने विशेषज्ञ वक्ताओं की क्षमता संवर्धन व्याख्यानमालाओं का ऑनलाइन आयोजन किया। पाठ्यक्रमों में शामिल विषयों, यथा; भारतीय काव्यशास्त्र, भाषा विज्ञान, सिनेमा अध्ययन और कौशल संवर्धन, हिंदी शोध प्रविधि, पाश्चात्य काव्य सिद्धांत, स्त्री विमर्श, सिद्धांत और सृजन पर केंद्रित क्षमता संवर्धन ऑनलाइन कार्यशालाओं में शताधिक हिंदी प्राध्यापक शामिल हुए। उक्त कार्यशालाओं में सीधे विषय से जुड़े विद्वानों और अनुप्रयोग के क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके विशेषज्ञों के व्याख्यानों का लाभ फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से हजारों प्राध्यापकों और शोधार्थियों तक पहुँच रहा है। गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के साथ संयुक्त तत्त्वावधान में यूजीसी के मानकों के अनुरूप “आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास का पुनर्लेखन” विषय पर ‘संकाय संवर्धन कार्यक्रम’ का आयोजन भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद की उल्लेखनीय उपलब्धि रही। परिषद ने अपनी अखिल भारतीय उपस्थिति को सुदृढ़ करने तथा हिंदी प्राध्यापकों को साथ मिल-बैठ कर चर्चा करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन किया। इस क्रम में ‘भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद’ ने “भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषा शिक्षण” विषय पर पहली अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं हिंदी प्राध्यापक सम्मेलन का आयोजन बेंगलुरू में ‘एलायंस विश्वविद्यालय’ के साथ संयुक्त तत्त्वावधान में किया। दक्षिण भारत में आयोजित इस संगोष्ठी को अभूतपूर्व सफलता मिली। “भारतीय साहित्य : भाव एक, भाषाएं अनेक” विषय पर केंद्रित दूसरी राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं हिंदी प्राध्यापक सम्मेलन पश्चिम भारत में गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय (वडोदरा) के हिंदी विभाग के साथ संयुक्त तत्त्वावधान में सम्पन्न हुआ। वडोदरा संगोष्ठी में सत्रह राज्यों के तीस विश्वविद्यालयों से शताधिक प्रतिभागी शामिल हुए। परिषद ने अपनी तीसरी राष्ट्रीय संगोष्ठी उत्तर भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, ग्रेटर नोएडा में आयोजित की। “स्वाधीनता आंदोलन और हिंदी साहित्य” विषय पर यह द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के ‘मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान स्कूल’ के संयुक्त तत्वावधान संपन्न हुई। दक्षिण, पश्चिम और उत्तर भारत के बाद ‘भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद’ ने अपनी चौथी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी पूर्वी भारत के कोलकाता महानगर में 29-30 मई, 2026 को आयोजित की है। हिंदी पत्रकारिता की द्वि-शताब्दी के निमित्त “हिंदी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के विकास में पत्रकारिता का योगदान” विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में निर्धारित समय के भीतर प्राप्त चयनित प्रपत्रों का संकलन पुस्तकाकार प्रकाशित करते हुए परिषद को हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। उक्त आयोजनों से प्राप्त अनुभवों और सुझावों को कार्यान्वित करने में परिषद को आशातीत सफलता मिली है। परिषद के आमंत्रण पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने ज्ञान और अनुभव से प्रतिभागियों का समुचित मार्गदर्शन किया है। हिंदी प्राध्यापकों के बीच सहकार, समन्वयन एवं सहभागिता को बढ़ावा देने के संगठनात्मक प्रयासों के क्रम में परिषद ने हिंदी अध्ययन एवं अध्यापन के क्षेत्र में जाति, पंथ, वर्ग, वाद, विचारधारा और राजनीति से ऊपर उठकर एक ऐसे राष्ट्रीय मंच के रूप में स्वयं को प्रस्तुत किया है, जहां सामान्य हिंदी प्राध्यापक भी अपनी चुनौतियों को साझा कर सकता है तथा अपने अनुभवों से दूसरे साथियों के लिए संभावनाओं की नई राह दिखा सकता है। आशा है आप सभी का सहयोग और समर्थन भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद को प्राप्त होता रहेगा। धन्यवाद!
| प्रो. राजेश पासवान कोषाध्यक्ष भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद |
प्रो. संजीव कुमार दुबे राष्ट्रीय संयोजक एवं महासचिव भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद |
प्रो. विनोद कुमार मिश् अध्यक्ष भारतीय हिंदी प्राध्यापक परिषद |

